क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे देश में हर साल लाखों युवा डिग्री लेकर कॉलेज से निकलते हैं, लेकिन जब बात नौकरी की आती है, तो कंपनियों का एक ही जवाब होता है— “इनके पास इंडस्ट्री के हिसाब से प्रैक्टिकल स्किल्स (Skills) नहीं हैं।”
सालों से हमारा एजुकेशन सिस्टम सिर्फ थ्योरी और नंबरों की रेस में भाग रहा था। लेकिन नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) ने इस पूरी तस्वीर को बदलने की नींव रख दी है। NEP 2020 का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम है वोकेशनल एजुकेशन (Vocational Education) यानी व्यावसायिक शिक्षा को मेनस्ट्रीम पढ़ाई का हिस्सा बनाना।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि NEP 2020 में वोकेशनल एजुकेशन को लेकर क्या-क्या बड़े बदलाव किए गए हैं और ये हमारे युवाओं के भविष्य के लिए गेम-चेंजर कैसे साबित होंगे।
1. क्लास 6 से ही शुरू होगी ‘स्किल ट्रेनिंग’ (The Bagless Days)
अब तक बच्चों को स्कूल में सिर्फ किताबी ज्ञान दिया जाता था। लेकिन NEP 2020 के तहत, वोकेशनल एजुकेशन की शुरुआत क्लास 6 से ही हो जाएगी।
- 10 Bagless Days: स्कूलों में साल के 10 दिन ‘बैगलेस’ (बिना बस्ते के) होंगे। इन दिनों में बच्चों को स्थानीय कारीगरों, कारपेंटर, कुम्हार, पॉटर (मिट्टी के बर्तन बनाने वाले), या सॉफ्टवेयर डेवलपर्स के साथ इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा।
- मकसद यह है कि बचपन से ही बच्चों के हाथ में कोई न कोई ऐसा हुनर हो, जो आगे चलकर उनका करियर बन सके।
2. ‘मेनस्ट्रीम’ और ‘वोकेशनल’ के बीच का भेदभाव खत्म
पहले वोकेशनल कोर्सेस को थोड़ा ‘हल्का’ या कमतर आंका जाता था। ऐसा लगता था कि जो साइंस या मैथ्स नहीं पढ़ सकता, वो वोकेशनल कोर्स करेगा।
- NEP 2020 ने इस सोच (Hard Separation) को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
- अब Arts, Science, Commerce और Vocational Education के बीच कोई सख्त दीवार नहीं होगी। एक स्टूडेंट अगर फिजिक्स पढ़ रहा है, तो वह अपनी रूचि के हिसाब से साथ में ‘फैशन डिजाइनिंग’ या ‘कोडिंग’ (Vocational Skill) भी सीख सकता है।
3. कॉलेज लेवल पर क्या बदलेगा? (Higher Education & B.Voc)
कॉलेज की पढ़ाई में वोकेशनल एजुकेशन को जोड़ने के लिए बहुत ही शानदार सिस्टम तैयार किया गया है:
- क्रेडिट ट्रांसफर (Credit Bank): अगर कोई स्टूडेंट वोकेशनल कोर्स करता है, तो उसके क्रेडिट्स उसके ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ (ABC) में जुड़ेंगे।
- मल्टीपल एंट्री-एग्जिट (Multiple Entry & Exit): अगर कोई छात्र 1 साल बाद कॉलेज छोड़ता है, तो उसे Certificate मिलेगा, 2 साल बाद ‘डिप्लोमा’ और 3-4 साल बाद पूरी डिग्री। इससे बीच में पढ़ाई छोड़ने वालों का समय बर्बाद नहीं होगा और वे अपनी सीखी हुई स्किल के बेस पर तुरंत जॉब मार्केट में उतर सकेंगे।
- डिग्री प्रोग्राम्स में स्किल्स का तड़का: B.Voc (Bachelor of Vocation) जैसी डिग्रियों को और मजबूत किया जाएगा और सामान्य डिग्रियों (BA, BSc) के साथ भी स्किल्स जोड़े जाएंगे।
4. ‘लोक विद्या’ (Lok Vidya) का सम्मान
NEP 2020 सिर्फ मॉडर्न टेक्नोलॉजी (AI, कोडिंग) की बात नहीं करती, बल्कि यह भारत की पारंपरिक स्किल्स को भी वापस ला रही है। इसे ‘लोक विद्या’ का नाम दिया गया है।
- हस्तकला (Handicrafts), कृषि तकनीक, और पारंपरिक कलाओं को वोकेशनल एजुकेशन के सिलेबस में जोड़ा जाएगा।
- इससे न सिर्फ हमारी संस्कृति बचेगी, बल्कि स्थानीय रोजगार (Local Employment) को भी ज़बरदस्त बूस्ट मिलेगा।
5. 2026 तक 50% छात्रों को ‘हुनरमंद’ बनाने का लक्ष्य
सरकार का टारगेट बहुत क्लियर है। NEP 2020 के दस्तावेज़ में साफ लिखा है कि 2026 तक भारत के कम से कम 50% स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को वोकेशनल एजुकेशन का एक्सपोजर मिलना ही चाहिए। इसके लिए स्कूलों, ITI, पॉलिटेक्निक और लोकल इंडस्ट्रीज को आपस में जोड़ा जा रहा है।
आखिर में…
रट्टा मारकर पास होने वाले दिन अब लदने वाले हैं। नई शिक्षा नीति 2020 का सीधा संदेश है— डिग्री आपको इंटरव्यू के दरवाज़े तक ले जा सकती है, लेकिन अंदर आपको आपकी स्किल्स (Skills) ही लेकर जाएंगी। वोकेशनल एजुकेशन अब कोई साइड-ऑप्शन (Side Option) नहीं, बल्कि एक मेनस्ट्रीम करियर पाथ बन चुका है। जो युवा जितनी जल्दी इस बात को समझेंगे और अपने हाथों में हुनर (Skill) लाएंगे, आने वाला कल उन्हीं का होगा!
आपको क्या लगता है? क्या क्लास 6 से ही इंटर्नशिप शुरू करना एक सही कदम है? अपने विचार कमेंट्स में जरूर शेयर करें!
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