क्या आप जानते हैं कि Samagra Shiksha के तहत 11वीं-12वीं के सरकारी स्कूल के छात्र पढ़ाई के दौरान ही ₹3000 तक का स्टाइपेंड कमा रहे हैं? इस आर्टिकल में आपको 80 घंटे की OJT (On-the-Job Training) का नियम और इंटर्नशिप पाने का पूरा स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस मिलेगा, जो कोई स्कूल आपको सीधे तौर पर नहीं समझाता। जून 2026 की स्थिति के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education) के नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। अब स्किल्स सिर्फ किताबों में नहीं, बल्कि बाज़ार में जाकर सीखे जा रहे हैं।
सुबह के 9 बज रहे हैं। गुजरात के एक सरकारी स्कूल का 11वीं का छात्र, राहुल, अपनी स्कूल यूनिफॉर्म में नहीं, बल्कि एक स्थानीय रीटेल मार्ट (Retail Mart) की टी-शर्ट पहने हुए ग्राहकों को बिलिंग काउंटर पर अटेंड कर रहा है। आपको शायद लग रहा होगा कि राहुल ने स्कूल छोड़ दिया है या वह किसी मजबूरी में बाल मज़दूरी कर रहा है। लेकिन नहीं! राहुल अपनी स्कूल की पढ़ाई का ही एक अहम हिस्सा पूरा कर रहा है। इसके लिए उसे बकायदा स्कूल से परमिशन मिली है, उसके माता-पिता ने ‘Consent Form’ साइन किया है, और महीने के अंत में उसे इस काम के लिए 3,000 रुपये का स्टाइपेंड भी मिलने वाला है।
मैंने पिछले कई सालों में ग्राउंड लेवल पर Vocational Education को बदलते देखा है। इस गाइड में, हम समझेंगे कि Samagra Shiksha Internship का “Earn While You Learn” मॉडल असल में कैसे काम करता है।
अर्न व्हाइल यू लर्न: पढ़ाई के साथ कमाई का शानदार मौका
समग्र शिक्षा के तहत सोलह से अधिक व्यावसायिक क्षेत्रों में छात्रों को काम करने का अवसर मिल रहा है, जिससे वे स्कूल के दौरान ही स्टाइपेंड कमाकर ड्रॉपआउट दर में कमी ला रहे हैं। भारत में हमेशा से एक बात कही जाती है – “पहले पढ़ाई पूरी कर लो, फिर नौकरी के बारे में सोचना।” लेकिन Samagra Shiksha Abhiyan ने इस पुरानी सोच को बदल कर रख दिया है।
Samagra Shiksha गुजरात के आधिकारिक पोर्टल (Lighthouse platform) के डेटा को जब मैंने पहली बार देखा, तो मुझे भी सुखद आश्चर्य हुआ। वहां 16 से ज्यादा Vocational Sectors में बच्चे काम कर रहे हैं और उन्हें अपनी लर्निंग के दौरान एक छोटा ‘Stipend’ भी मिल रहा है।
आखिर इसकी ज़रूरत क्यों पड़ी?
अक्सर देखा जाता है कि 10वीं के बाद कई बच्चे आर्थिक तंगी के कारण स्कूल छोड़ देते हैं। मिजोरम और नागालैंड जैसे राज्यों की रिपोर्ट साफ़ कहती है कि जब बच्चों को स्कूल के दौरान ही IT/ITeS, Retail, या Healthcare जैसे ट्रेड्स में काम करके पैसे कमाने का मौका मिलता है, तो वे पढ़ाई नहीं छोड़ते। यहीं से असली बदलाव की शुरुआत होती है, क्योंकि अब बच्चा परिवार पर बोझ नहीं, बल्कि एक आर्थिक सहारा बन रहा है।
सरकारी स्कूल में इंटर्नशिप कैसे मिलती है: स्टेप बाय स्टेप गाइड
कक्षा ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए उद्योग के साथ एमओयू साइन करके व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है। यह कोई प्राइवेट कॉलेज का प्लेसमेंट सेल नहीं है, जहाँ बड़ी-बड़ी कंपनियाँ आएंगी। यहाँ का प्रोसेस बहुत ही ग्राउंड-लेवल और प्रैक्टिकल है:
कदम 1: सही विषय का चुनाव
इंटर्नशिप मुख्य रूप से 11वीं और 12वीं के छात्रों के लिए अनिवार्य है। शिक्षा मंत्रालय (MoE) के अनुसार, स्कूलों में 138 Job Roles अप्रूव्ड हैं। आपको 9वीं कक्षा में ही एक Vocational Subject चुनना होता है।
कदम 2: माता-पिता की सहमति
कोई भी छात्र सीधे किसी दुकान या कंपनी में काम करने नहीं जा सकता। PSSCIVE की गाइडलाइंस के अनुसार, माता-पिता को एक ‘Consent Form for OJT’ (Annexure 2) पर साइन करना होता है कि वे अपने बच्चे को 80 घंटे की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के लिए भेज रहे हैं।
कदम 3: इंडस्ट्री के साथ समझौता
यहीं पर आपके Vocational Trainer (VT) और स्कूल प्रिंसिपल का सबसे बड़ा रोल आता है। ट्रेनर आपके इलाके की किसी लोकल कंपनी, अस्पताल, या बड़ी दुकान के पास जाते हैं और स्कूल की तरफ से एक आधिकारिक MoU (Memorandum of Understanding) साइन करते हैं।
पीएसएससीआईवीई और एनएसक्यूएफ के अस्सी घंटे ओजेटी नियम
पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान ने ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्रों के लिए अस्सी घंटे की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को अनिवार्य कर दिया है, जो बोर्ड प्रैक्टिकल के पच्चीस प्रतिशत अंकों को प्रभावित करता है। बहुत से लोग सोचते हैं कि इंटर्नशिप करना या ना करना छात्र की मर्ज़ी है। लेकिन असली बात यह है कि यह CBSE और स्टेट बोर्ड के नियमों से सीधा जुड़ा हुआ है। PSSCIVE (पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल) जो भारत में Vocational Education का सिलेबस बनाता है, उसने 2026 की अपनी गाइडलाइंस में स्पष्ट कर दिया है:
- 11वीं और 12वीं के लिए OJT (On-the-Job Training) अनिवार्य है।
- कम से कम 80 घंटे की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग पूरी करनी ही होगी।
80 घंटे की OJT रिपोर्ट सिर्फ एक फाइल नहीं है; अगर यह सीबीएसई एक्सटर्नल एग्जामिनर को सबमिट नहीं की गई, तो छात्र 50 प्रैक्टिकल मार्क्स में सीधे फेल हो सकता है। अगर आप इसे एक प्रेशर कुकर की तरह सोचें, तो थ्योरी की क्लास पानी की तरह है, लेकिन असली प्रेशर और भाप तब बनती है जब आप 80 घंटे उस काम को असली दुनिया में करते हैं।
वोकेशनल ट्रेनर की भूमिका: इंडस्ट्री के साथ समझौता
वोकेशनल ट्रेनर स्कूल और स्थानीय बाजार के बीच एक पुल का काम करते हैं, जो स्थानीय व्यवसायों को मुफ्त सपोर्ट स्टाफ के फायदे समझाकर एमओयू साइन करवाते हैं। यह मेरा सबसे पसंदीदा हिस्सा है। लोग सोचते हैं कि सरकारी स्कूलों के टीचर सिर्फ क्लास में पढ़ाते हैं। लेकिन एक Vocational Trainer (VT) की ज़िंदगी इससे बहुत अलग है।
सोचिए, एक VT को कितनी मेहनत करनी पड़ती है। मान लीजिए, स्कूल में ‘Beauty & Wellness’ का कोर्स है। ट्रेनर खुद शहर के नामी ब्यूटी पार्लर्स और सैलून्स में जाता है। वहाँ के मैनेजर से बात करता है: “देखिए, मेरे पास 11वीं की 10 बच्चियां हैं जिन्हें बेसिक मेकअप की थ्योरी आती है। क्या आप इन्हें अपने यहाँ ट्रेनिंग दे सकते हैं?” वीटी (VT) का असली संघर्ष क्लासरूम में नहीं, बल्कि लोकल ब्यूटी पार्लर और दुकानों के मालिकों को एनएसडीसी (NSDC) के फायदे समझाकर एमओयू (MoU) साइन करवाने में है। शुरुआत में बहुत से दुकानदार मना कर देते हैं। लेकिन जब उन्हें पता चलता है कि ये बच्चे NSDC (National Skill Development Corporation) के मानकों पर ट्रेंड हैं और इससे उनके सैलून को फ्री या सस्ते में सपोर्ट स्टाफ मिल जाएगा, तो वे तैयार हो जाते हैं।
प्रोडक्शन कम स्किल ट्रेनिंग सेंटर का नया मॉडल
शनिवार को स्कूलों की लैब को सर्विस सेंटर में बदलकर छात्रों को सीधे समुदाय को सेवाएं देकर पैसे कमाने का मौका दिया जा रहा है। अब एक ऐसे मॉडल की बात करते हैं जो बहुत तेज़ी से पॉपुलर हो रहा है। अगर किसी शहर में इंटर्नशिप के लिए कंपनियाँ ही ना हों, तो क्या करें? यहाँ काम आता है ‘Production-cum-Skill Training Centers’ का मॉडल।
यह काम कैसे करता है?
शनिवार को, जब स्कूल बंद होता है, तब स्कूल की लैब को एक “सर्विस सेंटर” में बदल दिया जाता है।
- IT/ITeS के बच्चे आस-पास के लोगों के लिए फॉर्म भरते हैं, या आधार कार्ड प्रिंट करते हैं।
- Beauty & Wellness की छात्राएं कम्युनिटी की महिलाओं को डिस्काउंटेड रेट पर ब्यूटी सर्विसेस देती हैं।
LAQSH जैसी ट्रेनिंग एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मॉडल में कम्युनिटी के लोग बहुत कम कीमत पर सर्विस लेते हैं, और उस सर्विस से जो पैसा आता है, वह सीधा छात्रों की जेब में जाता है।
इंटर्नशिप स्टाइपेंड: बच्चों को असल में कितने पैसे मिलते हैं?
इंटर्नशिप के दौरान एक छात्र अपनी ट्रेनिंग पूरी होने पर औसतन पंद्रह सौ से तीन हजार रुपये प्रति माह तक का स्टाइपेंड प्राप्त कर सकता है। यह वो सवाल है जो हर छात्र की आंखों में चमक ला देता है। “सर, पैसे कितने मिलेंगे?”
देखिए, मैं यहाँ आपको झूठे सपने नहीं दिखाऊंगा। यह कोई IT इंजीनियर की जॉब नहीं है जहाँ लाखों का पैकेज मिलेगा। यह स्कूल लेवल की इंटर्नशिप है। अलग-अलग VTP रिपोर्ट्स और गुजरात के Lighthouse मॉडल के डेटा का विश्लेषण करें, तो एक छात्र औसतन:
- ₹1,500 से ₹3,000 प्रति माह (या पूरे 80 घंटे के प्रोजेक्ट के लिए) कमा सकता है।
सोशल प्रूफ और सफलता:
146 उत्तराखंड के छात्रों ने स्कूल-लेवल जॉब फेयर में हिस्सा लिया – उन्हें 12वीं पास करते ही डायरेक्ट फुल-टाइम जॉब लेटर्स मिले, जो इस व्यावसायिक शिक्षा स्कीम की सबसे बड़ी सफलता है।
ओजेटी रिपोर्ट और डेली वर्क रजिस्टर कैसे तैयार करें?
इंटर्नशिप पूरी होने के बाद छात्रों को अपने दैनिक काम का विवरण एनेक्सचर पांच (Annexure 5) में भरकर स्कूल और एग्जामिनर को जमा करना अनिवार्य है। इंटर्नशिप कर लेना ही काफी नहीं है, इसे कागज़ों पर साबित करना भी ज़रूरी है। PSSCIVE के नियमों के तहत, छात्रों को Annexure 5 (OJT Report) तैयार करनी होती है।
OJT Report कैसे बनाएं?
- रजिस्टर बनाएं: रोज़ाना जो भी काम आपने सीखा (जैसे- “आज मैंने MS Excel में इन्वेंटरी बनाना सीखा”), उसे डेली रजिस्टर में लिखें।
- हस्ताक्षर करवाएं: रोज़ाना उस रजिस्टर पर अपने कंपनी सुपरवाइजर के साइन (Signature) करवाएं।
- फाइनल रिपोर्ट: 80 घंटे पूरे होने के बाद, उन सभी डेली रिपोर्ट्स को मिलाकर एक फाइनल ‘OJT Report’ टाइप करें।
- सबमिशन: इसे अपने VT को सबमिट करें। यही रिपोर्ट आपके CBSE या स्टेट बोर्ड के एक्सटर्नल एग्जामिनर चेक करेंगे।
मिडिल स्कूल के लिए दस बैगलेस डेज का नियम
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत कक्षा छह से आठ के छात्रों को बिना बस्ते के स्थानीय कारीगरों से काम सीखने का मौका मिलेगा, जो भविष्य की इंटर्नशिप की नींव है। अगर बात इंटर्नशिप की हो रही है, तो NEP 2020 (National Education Policy) के सबसे बेहतरीन नियम का ज़िक्र करना ज़रूरी है।
कक्षा 6 से 8 (Middle School) के बच्चों के लिए ’10 Bagless Days’ अनिवार्य कर दिए गए हैं। इसका मतलब है कि साल में 10 दिन बच्चे बिना बस्ते (बिना किताबों) के स्कूल आएंगे। इन 10 दिनों में उन्हें लोकल कारीगरों (Local Vocational Experts) के पास भेजा जाएगा-जैसे कुम्हार, कारपेंटर, या लोकल इलेक्ट्रीशियन – ताकि वे हाथ से काम करने की इज़्ज़त सीख सकें। यह कोई इंटर्नशिप नहीं है, बल्कि भविष्य के B.Voc (Bachelor of Vocation) डिग्री की नींव है।
निष्कर्ष:
समग्र शिक्षा का यह कार्यक्रम छात्रों को सिर्फ मार्कशीट नहीं, बल्कि व्यावहारिक अनुभव और पहली कमाई का आत्मविश्वास दे रहा है। याद हैं वो राहुल, जिसकी बात हमने शुरुआत में की थी? जब वो 12वीं पास करेगा, तो उसके हाथ में सिर्फ एक मार्कशीट नहीं होगी। उसके हाथ में एक ‘Experience Letter’, काम करने का आत्मविश्वास, और खुद की कमाई हुई पहली सैलरी का अहसास होगा।
Samagra Shiksha की यह internship class 12 स्कीम कोई परफेक्ट सिस्टम नहीं है। आज भी कई स्कूलों में VTs को MoUs साइन करवाने में दिक्कतें आती हैं। यह सफर लंबा है, लेकिन नामुमकिन नहीं। अगर आप एक छात्र हैं, तो आज ही अपने ट्रेनर से पूछिए कि आपके शहर में OJT के क्या विकल्प हैं।
(पारदर्शिता सूचना: इस लेख में दिए गए आंकड़े PSSCIVE, MoE और Samagra Shiksha की 2026 OJT गाइडलाइंस पर आधारित हैं।)