जून 2026 की स्थिति के अनुसार, भारत में समग्र शिक्षा अभियान के तहत काम करने वाले 60,000 से ज़्यादा प्रमाणित वोकेशनल ट्रेनर्स में से ज़्यादातर आज भी यही सोचकर सोते हैं कि कल उनकी नौकरी रहेगी भी या नहीं। एक तरफ दिल्ली में ₹38,100 मिल रहा है, तो दूसरी तरफ उत्तराखण्ड और मध्य प्रदेश में एक वॉट्सऐप मैसेज से 6,000 लोगों की नौकरी गई।
वोकेशनल ट्रेनर की सैलरी 2026: राज्यवार अपडेट
समग्र शिक्षा अभियान एक ही योजना है। एनएसक्यूएफ के एक ही नियम हैं। फिर सैलरी में यह ज़मीन-आसमान का अंतर क्यों? दिल्ली में वोकेशनल ट्रेनर्स को अब ₹38,100 मिल रहे हैं। पहले ₹20,000 से ₹23,000 मिलते थे। यह लगभग 90% की बढ़ोतरी है और मई 2026 से लागू हो चुकी है। समग्र शिक्षा केंद्रों के टीचर्स को भी ₹21,000 से बढ़ाकर ₹35,420 किया गया है।
हरियाणा में ₹36,500 घोषित किया गया है। लागू होने का इंतज़ार है। पंजाब में वीटीसी को ₹35,514 मिलते हैं। यह 11 महीने की संविदा है। जम्मू-कश्मीर में 2022 से पहले नियुक्त ट्रेनर्स को ₹25,000 मिलते हैं। पहले ₹24,000 थे। 2022 के बाद नियुक्त ट्रेनर्स को ₹22,000 मिलते हैं। पहले ₹20,000 थे। दोनों के एरियर अप्रैल 2024 से दिए जा रहे हैं। असम में ट्रेनर्स को लगभग ₹23,000 मिलते हैं। लेकिन यह टीएमपी के ज़रिए है, सीधी सरकारी नौकरी नहीं। राजस्थान में अभी भी सिर्फ़ ₹22,000 मिल रहे हैं। कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। हिमाचल प्रदेश में ₹20,000 से ₹25,000 के बीच मिलता है। ट्रेनर्स लगातार वेतन वृद्धि की माँग कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश में पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर्स को ₹17,000 मिलते हैं। पहले ₹9,000 मिलते थे। यह लगभग 89% की बढ़ोतरी है और 2026-27 सत्र से लागू है। उत्तराखण्ड में ₹15,000 तीन सालों से कोई बढ़ोतरी नहीं, वहीं पहले बैच के VTs को 1 अप्रैल से बाहर किया गया है।
दिल्ली और राजस्थान में एक ही NSQF पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले ट्रेनर की सैलरी में ₹16,100 का अंतर है – यह केवल राजनीतिक इच्छाशक्ति का अंतर है, योग्यता का नहीं।
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: वोकेशनल टीचर्स को ₹38,100 मासिक वेतन
मई 2026 में दिल्ली कैबिनेट ने ऐतिहासिक फैसला लिया। 1,131 वोकेशनल ट्रेनर्स की सैलरी ₹20,000-23,000 से बढ़ाकर ₹38,100 कर दी गई। 784 समग्र शिक्षा केंद्रों के टीचर्स को भी ₹21,000 से ₹35,420 मिलने लगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ कहा:“यह सिर्फ़ वित्तीय फैसला नहीं, बल्कि उन शिक्षकों के समर्पण की पहचान है जो चुनौतीपूर्ण हालात में काम कर रहे हैं।”
राजस्थान vs दिल्ली: वेतन में ₹16,000 का अंतर, क्यों?
राजस्थान में 5,155 वोकेशनल ट्रेनर्स 4,019 सरकारी स्कूलों में 16 ट्रेड्स पढ़ा रहे हैं। 2015 से यह सिलसिला चल रहा है। लेकिन आज भी उन्हें मात्र ₹22,000 मिलते हैं। ₹1,500 की बढ़ोतरी घोषित हुई थी, एक साल बाद भी लागू नहीं हुई। राजस्थान के ट्रेनर्स की सबसे बड़ी माँग: हरियाणा मॉडल। वे चाहते हैं कि प्लेसमेंट एजेंसियों को हटाकर सरकार उन्हें सीधे शिक्षा विभाग में ले।
हरियाणा मॉडल: क्या वोकेशनल ट्रेनरों को मिलेगी स्थायी नियुक्ति?
हरियाणा में ट्रेनर्स को लगभग ₹36,500 मिलने की खबर है। लेकिन इससे भी ज़्यादा अहम है हरियाणा मॉडल का मतलब:
- VTP एजेंसियों का पूर्ण उन्मूलन
- सीधी भर्ती शिक्षा विभाग के अधीन
- नियमित वेतन और जॉब सिक्योरिटी
राजस्थान और मध्य प्रदेश के ट्रेनर्स लगातार इसी मॉडल की माँग कर रहे हैं। पंचकुला में “प्रचंड” आंदोलन हुआ। सोनीपत में 1,400 संविदा शिक्षकों ने मंत्री को ज्ञापन सौंपा। (स्रोत: ETV Bharat/Bhaskar, मई-जून 2026)
राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब VTP एजेंसियाँ नहीं बदल सकतीं नौकरी
जून 2026। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने ऐसा फैसला सुनाया जो पूरे देश में नज़ीर बन सकता है। मामला क्या था? VTP का टेंडर खत्म हुआ। नई एजेंसी ने पुराने ट्रेनर्स को निकालकर नए लोग रखने की कोशिश की। कोर्ट ने कहा कि “एक सेट के संविदा कर्मचारियों को दूसरे सेट के संविदा कर्मचारियों से रिप्लेस नहीं किया जा सकता। जब तक समग्र शिक्षा की योजना चल रही है, तब तक पुराने ट्रेनर्स को काम करने का कानूनी अधिकार है।”
कोर्ट के आदेश:
- राज्य सरकार सीधे ट्रेनर्स की नियुक्ति करे (बिना VTP के)
- मानदेय सीधा बैंक खाते में ट्रांसफर हो (डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर)
- पुरानी एजेंसी द्वारा की गई बर्खास्तगी रद्द
क्या इसका मतलब पक्की नौकरी है? नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया: रोज़गार संविदा ही रहेगा। लेकिन जॉब सिक्योरिटी अब कानूनी तौर पर मज़बूत है। VTP की मनमानी अब नहीं चलेगी।
VTP और TMP एजेंसियों का खेल: क्यों हो रहा है शोषण?
वोकेशनल ट्रेनिंग प्रोवाइडर (VTP) और ट्रेनिंग मैनेजमेंट पार्टनर (TMP) — ये नाम हज़ारों ट्रेनर्स के लिए डरावने सपने बन गए हैं।असम का उदाहरण लें। 2018 से ट्रेनर्स TMPs के ज़रिए रखे गए हैं। एक ट्रेनर ने कहा:
“हम सेंट्रल गवर्नमेंट की स्कीम के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन कागज़ों पर हम एक प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी हैं। यह एक अंतर हमारी पूरी ज़िंदगी को प्रभावित करता है। कई महीनों में दोस्तों से पैसे उधार लेकर खाना और यात्रा करनी पड़ती है।”
शोषण के तीन स्तंभ:
- वेतन में देरी: असम और झारखंड में 3-4 महीने रुटीन। कभी-कभी 14 महीने तक।
- PF का गणित गायब: सैलरी से PF कटता है, लेकिन हिसाब कोई नहीं देता। गर्मियों की छुट्टियों में भी अटेंडेंस लगानी पड़ती है।
- जॉब सिक्योरिटी शून्य: हर साल टेंडर रिन्यू। VTP बदला, तो आप बाहर।
मध्य प्रदेश में 6,000 वोकेशनल ट्रेनरों की सेवाएँ समाप्त: क्या है पूरा मामला?
मई 2026 के अंत में, मध्य प्रदेश के 6,000 से ज़्यादा ट्रेनर्स को एक वॉट्सऐप मैसेज से बता दिया गया: “31 मई से आपकी सेवाएँ समाप्त।” कोई आधिकारिक आदेश नहीं। कोई पूर्व सूचना नहीं। 10 साल तक बिना वेतन वृद्धि के काम किया। प्रोजेक्ट अपडेट्स और टेंडर रिन्यूअल के नाम पर बाहर। MP में वोकेशनल एजुकेशन का बजट बढ़ा, लेकिन पैसा VTP की जेब में गया, ट्रेनर्स के हाथ में नहीं। यह पैटर्न देशभर में दिख रहा है।
देशभर में वोकेशनल ट्रेनरों का आंदोलन: क्या है मांग?
यह गुस्सा सिर्फ़ एक राज्य का नहीं है:
- झारखंड: 2,000+ ट्रेनर्स मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर। 14 महीने से वेतन नहीं। बच्चों की फीस, किराया, दवाई – सब अटका हुआ है।
- पश्चिम बंगाल: विकास भवन के सामने धरना। 12 साल से एक रुपये की बढ़ोतरी नहीं। CSS-VSE NSQF प्रोजेक्ट टीचर्स, शिक्षा बंधु – सब एकजुट। माँग? थर्ड-पार्टी एजेंसी सिस्टम खत्म करो।
- हिमाचल प्रदेश: प्रवीण मेग्टा के नेतृत्व में HP वोकेशनल ट्रेनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुखु को ज्ञापन सौंपा। 13 साल की सेवा। माँग? स्थायी नीति, 5% वार्षिक वेतन वृद्धि, शिक्षा विभाग में विलय।
केंद्र सरकार की नई पहल: Skill Instructor Registry (SIR) का क्या असर होगा?
कौशल विकास मंत्रालय एक बड़ा कदम उठा रहा है:
- स्किल इंस्ट्रक्टर रजिस्ट्री (SIR)
- नेशनल इंस्ट्रक्टर मैनेजमेंट सिस्टम (NIMS) — डेटा रिपॉजिटरी
- हर ट्रेनर को यूनिक आईपीआरएन (Instructor Permanent Registration Number)
- AI-आधारित परफॉरमेंस असेसमेंट
95,000 की क्षमता, 14,000+ आईटीआई में 60,000 प्रमाणित ट्रेनर्स। क्या यह VTP सिस्टम खत्म करेगा? सीधे तौर पर नहीं।लेकिन सरकार के पास हर ट्रेनर का सीधा डेटा होगा। फर्जी VTP पर लगाम लगेगी। भविष्य में डायरेक्ट रिक्रूटमेंट का रास्ता साफ हो सकता है।
क्या बनेगी वोकेशनल ट्रेनरों के लिए स्थायी नीति? राज्यवार अपडेट
- दिल्ली में ट्रेनर्स संविदा पर हैं, लेकिन उच्चतम वेतन मिल रहा है। सैलरी बढ़ी है, लेकिन स्थायी नीति की माँग जारी है।
- हरियाणा में हरियाणा मॉडल की दिशा में काम चल रहा है। ₹36,500 घोषित हुआ है, लागू होने का इंतज़ार है।
- राजस्थान में ट्रेनर्स संविदा पर हैं। हाईकोर्ट ने जॉब सिक्योरिटी दी है। हरियाणा मॉडल की माँग और ज्ञापन दिए जा रहे हैं।
- जम्मू-कश्मीर में ट्रेनर्स संविदा पर हैं। VTP हटाने की माँग है। नियमितीकरण और सेवा उपनियम बनाने की माँग जारी है।
- हिमाचल प्रदेश में 13 साल से ट्रेनर्स संविदा पर हैं। मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया गया है। स्थायी नीति की माँग है।
- मध्य प्रदेश में 6,000+ ट्रेनर्स बर्खास्त किए गए हैं। राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
- झारखंड में 14 महीने से वेतन बकाया है। मुख्यमंत्री आवास पर प्रदर्शन जारी है।
- पश्चिम बंगाल में 12 साल से वेतन वृद्धि नहीं हुई है। विकास भवन पर धरना जारी है।
- असम में ट्रेनर्स TMP के ज़रिए काम कर रहे हैं। कोई नियमितीकरण नहीं है। एजेंसी हटाने की माँग है।
- उत्तराखण्ड में 200+ ट्रेनर्स बर्खास्त किये गये। समग्र से अभी तक कोई अपडेट नहीं।
PAB मीटिंग 2026-27: वोकेशनल एजुकेशन बजट और नीतिगत फैसले
परियोजना अनुमोदन बोर्ड (PAB) की बैठकें हर साल होती हैं। शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार की अध्यक्षता में। 2026 में हिमाचल प्रदेश को ₹720 करोड़ मंजूर हुए। लेकिन सवाल यह है: क्या यह पैसा VTP की जेब में जाएगा या सीधे ट्रेनर्स तक पहुँचेगा? हर साल जून में PAB मीटिंग्स होती हैं। हर वित्त वर्ष की शुरुआत में सैलरी रिवीजन का सिलसिला चलता है। यह साइक्लिकल प्रक्रिया है – ट्रेनर्स को इस पर नज़र रखनी होगी।