12वीं के बाद आईटीआई: क्या अब मिलेगा इंजीनियरिंग डिग्री के बराबर दर्जा और लाखों की सैलरी?

सुबह के 10 बजे हैं। कानपुर के एक छोटे से मोहल्ले में रहने वाले 20 साल के राहुल ने अभी-अभी अपना इलेक्ट्रीशियन का ट्रेड सर्टिफिकेट लिया है। उसके हाथों में हुनर है, लेकिन मन में एक टीस। जब वो देखता है कि उसके पड़ोस का लड़का बी.टेक करके ‘इंजीनियर’ बन गया है और उसे समाज में सिर्फ ‘मिस्त्री’ कहा जाता है, तो उसे एजुकेशन सिस्टम का वो फासला बहुत चुभता है। “क्या मैं कभी डिग्री होल्डर कहलाऊंगा?” यह सवाल सिर्फ राहुल का नहीं, भारत के लाखों युवाओं का है। लेकिन जून 2026 की स्थिति के अनुसार, एक ऐसी खबर आई है जिसने इस पूरी बहस को पलट कर रख दिया है। ITI diploma to bachelor degree – यह कोई सोशल मीडिया की अफवाह नहीं है। सरकार ज़मीनी स्तर पर इस दिशा में काम कर रही है।

इकोनॉमिक सर्वे 2026 ने क्या कहा – क्या आईटीआई डिप्लोमा अब बैचलर डिग्री जितने होंगे?

इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में पहली बार आईटीआई डिप्लोमा को अपग्रेड करके बैचलर-लेवल डिग्री के बराबर मान्यता देने का ऐतिहासिक प्रस्ताव रखा गया है। इसका मुख्य उद्देश्य स्किल ट्रेनिंग को ‘डिग्री’ का सामाजिक सम्मान दिलाना और वोकेशनल छात्रों के लिए हायर एजुकेशन और सरकारी नौकरियों के रास्ते सीधे तौर पर खोलना है। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा ऐतिहासिक कदम क्यों उठाया जा रहा है? इसका सीधा जवाब हमारी सामाजिक मानसिकता में छिपा है। भारत में परिवार अक्सर डिग्री को स्टेटस और शादी से लेकर समाज के रुतबे तक जोड़कर देखते हैं। आप कितनी भी अच्छी ट्रेनिंग ले लें, जब तक आपके नाम के आगे ‘ग्रेजुएट’ नहीं लगता, आपको वो सम्मान नहीं मिलता। भारत में स्किल एजुकेशन को लेकर नज़रिया तेज़ी से बदल रहा है। जहाँ 2017-18 में केवल 8.1% लोग वोकेशनल ट्रेनिंग चुनते थे, वहीं अब यह आंकड़ा छलांग लगाकर 34.7% हो गया है। युवा स्किल चाहते हैं, लेकिन वो इसके बदले डिग्री का सम्मान भी डिज़र्व करते हैं।

आईटीआई करने वाले छात्रों के लिए क्या बदलेगा – हायर एजुकेशन, जॉब्स और स्टेटस?

डिग्री का दर्जा मिलने के बाद आईटीआई छात्र सीधे तौर पर ‘ग्रेजुएट’ लेवल की सरकारी नौकरियों (जैसे एसएससी सीजीएल) के लिए योग्य हो जाएंगे। इससे इंडस्ट्री में उनकी बार्गेनिंग पावर बढ़ेगी, शुरुआती वेतन में सुधार होगा और हायर एजुकेशन के प्रोफेशनल कोर्सेज में सीधी एंट्री मिल सकेगी।

  • ग्रेजुएट लेवल की नौकरियां: अभी ITI पास युवाओं को RRB Group D, ALP या PSU Technician जैसी जॉब्स ही मिलती हैं। डिग्री स्टेटस मिलने के बाद, वे उन सभी एग्जाम्स (जैसे SSC CGL) में बैठ सकेंगे, जहाँ बेसिक क्वालिफिकेशन ग्रेजुएट होती है।
  • सैलरी में उछाल का सच: आज की हकीकत यह है कि कई राज्यों में लगभग 42.9% पुरुष ITI ग्रेजुएट्स 10,000 से 14,999 रुपये की शुरुआती सैलरी पर काम कर रहे हैं। डिग्री का ठप्पा लगने से यह सैलरी गैप काफी हद तक कम हो सकेगा।
  • प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन: पहले वोकेशनल छात्रों के लिए बड़े सर्टिफिकेशन या इंजीनियरिंग के दरवाजे बंद थे। अब यह दीवार हमेशा के लिए टूट जाएगी।

लैटरल एंट्री क्या है – आईटीआई से इंजीनियरिंग डिग्री तक का सफर कैसे तय करें?

नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) के तहत आईटीआई छात्रों को डिजिटल क्रेडिट्स दिए जाते हैं। इन क्रेडिट्स का उपयोग करके छात्र सीधे बी.टेक या अन्य उच्च शिक्षा के दूसरे वर्ष में ‘लैटरल एंट्री’ पा सकते हैं, जिससे उन्हें तीन साल का लंबा इंजीनियरिंग डिप्लोमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। आज अगर आप B.Tech करना चाहते हैं, तो सीधे एडमिशन नहीं मिलता। आपको पहले 3 साल का थका देने वाला इंजीनियरिंग डिप्लोमा करना पड़ता है। लेकिन NEP 2020 और NCrF (National Credit Framework) के जरिए यह गेम पूरी तरह बदल रहा है:

  • क्रेडिट सिस्टम का गणित: 1 साल की वोकेशनल पढ़ाई अब 40 क्रेडिट्स (या 1,200 घंटे) के बराबर मानी जाती है।
  • अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC): आप ITI में जो भी प्रैक्टिकल सीखेंगे, उसके पॉइंट्स आपके डिजिटल ABC खाते में सेफ रहेंगे।

प्रस्तावित लैटरल एंट्री का नया एक्शन प्लान:

  1. अपनी ITI ट्रेनिंग पूरी करें और NSQF कंप्लायंट क्रेडिट्स को ABC पोर्टल पर लॉक करें।
  2. हायर एजुकेशन के लिए ज़रूरी अतिरिक्त क्रेडिट्स कमाने हेतु एक ‘ब्रिज कोर्स’ (Bridge Course) पूरा करें।
  3. सीधे यूनिवर्सिटी या इंजीनियरिंग कॉलेज के सेकंड ईयर में [लैटरल एंट्री एडमिशन पोर्टल] के जरिए अप्लाई करें।

क्या प्राइवेट आईटीआई को भी मिलेगा डिग्री का दर्जा?

नहीं, सभी प्राइवेट संस्थानों को यह दर्जा नहीं मिलेगा। केवल वही आईटीआई डिग्री स्टेटस के योग्य होंगे जो नीति आयोग और डीजीटी के कड़े क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (ग्रेड 2.5 या अधिक) और स्ट्राइव (STRIVE) फंडिंग के मानकों को पार करेंगे। भारत में कुल ITI संस्थानों में से सिर्फ 20.11% ही सरकारी हैं। बाकी सब प्राइवेट हैं। क्या हर गली-नुक्कड़ पर खुले संस्थान का डिप्लोमा बैचलर डिग्री बनेगा? बिल्कुल नहीं। नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, 12,352 ग्रेडेड आईटीआई का औसत ग्रेड 5 में से महज़ 1.41 पाया गया था। केवल 8% संस्थान ही ऐसे थे जो स्ट्राइव फंडिंग के लिए एलिजिबल थे। अगर आप 2026 या 2027 के बैच में एडमिशन लेने की सोच रहे हैं, तो संस्थान का DGT ग्रेड ज़रूर चेक करें।

अप्रेंटिसशिप मिशन क्या है और कैसे मिलेगा इसका फायदा?

इकोनॉमिक सर्वे 2026 में यूनिफाइड अप्रेंटिसशिप मिशन का प्रस्ताव है, जो शिक्षा मंत्रालय और कौशल विकास मंत्रालय की योजनाओं को मिलाएगा। इससे छात्रों को एक ही नेशनल पोर्टल के माध्यम से इंडस्ट्री ट्रेनिंग और स्टाइपेंड के बेहतरीन मौके मिलेंगे।क्लासरूम की पढ़ाई अपनी जगह है, लेकिन जब तक मशीन पर हाथ काले न हों, असली कारीगरी नहीं आती। वर्तमान में अप्रेंटिसशिप दो अलग-अलग हिस्सों में बंटी है:

  • नैप्स (NAPS): जो MSDE चलाता है, जिससे 2025 में 11.84 लाख अप्रेंटिस जुड़े थे।
  • नैट्स (NATS): जो शिक्षा मंत्रालय के अधीन है, जिसमें 5.23 लाख युवा ट्रेनिंग ले रहे थे।

इन दोनों को एक साथ लाकर नेशनल अप्रेंटिसशिप मिशन (NAM) बनाने की तैयारी है। इसका मतलब है कि अब आपको ट्रेनिंग और स्टाइपेंड के लिए अलग-अलग पोर्टल्स पर भटकना नहीं पड़ेगा।

यह नियम कब से लागू होगा – आगे का क्या है रास्ता?

इकोनॉमिक सर्वे 2026 की यह सिफारिश अभी नीतिगत स्तर पर है। इसे पूरी तरह से लागू होने, नए पाठ्यक्रम डिजाइन करने और संस्थानों को अपग्रेड करने में 2 से 3 साल का समय लग सकता है। यह मुख्य रूप से आने वाले नए बैच पर लागू होगा। मैं आपको कोई झूठी उम्मीद नहीं देना चाहता। कई छात्रों को लगता है कि “सर्वे में छप गया, तो अगले महीने से डिग्री मिल जाएगी।” सिस्टम ऐसे काम नहीं करता।

  • पीएम-सेतु (PM-SETU) का रोल: सरकार ने पहले ही 60,000 करोड़ रुपये की लागत से PM-SETU योजना लॉन्च की है, जिसके तहत 1,000 सरकारी ITI को अपग्रेड किया जा रहा है।
  • वर्तमान छात्रों के लिए कड़वा सच: अगर आप 2026 में पास आउट हो रहे हैं, तो आपकी पुरानी मार्कशीट रातों-रात डिग्री में नहीं बदलेगी। यह नियम नए करिकुलम वाले छात्रों पर प्रभावी होगा।

अंतिम विचार – हुनर को मिलेगा उसका असली सम्मान

याद है राहुल? कानपुर का वो लड़का जिसे सिस्टम में अपनी पहचान साबित करनी थी। आने वाले कुछ सालों में, राहुल जैसे लाखों युवाओं को समाज के तानों और सिस्टम की कमियों से नहीं जूझना पड़ेगा। यह सफर सिर्फ सरकारी कागज़ों का बदलाव नहीं है। यह सोच का बदलाव है। यह उस कारीगर का सम्मान है जिसके पसीने से देश का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा होता है। जब एक छात्र को यह पता होगा कि उसकी मेहनत उसे एक दिन ‘ग्रेजुएट’ का दर्जा दिलाएगी, तो उसके काम करने का जुनून कई गुना बढ़ जाएगा। अगर आप वर्तमान में आईटीआई कर रहे हैं, तो अपने काम में बेस्ट बनिए। अपने डिजिटल क्रेडिट्स को ABC पोर्टल पर सुरक्षित रखना शुरू करें। नीतियां अब आपके हक़ में खड़ी हो रही हैं।

यह लेख 29 जनवरी 2026 को संसद में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 और MSDE की ताज़ा रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें प्रस्तुत सभी डेटा पॉइंट्स एक स्वतंत्र सीनियर वोकेशनल एजुकेशन कंसल्टेंट द्वारा सत्यापित हैं। लेख का उद्देश्य निष्पक्ष सूचना प्रदान करना है।

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