अगर आप भारत के किसी भी सरकारी स्कूल से जुड़े हैं, तो आज 29 जून 2026 की सुबह आपने एक अजीब सी खामोशी और सड़कों पर एक बड़ा शोर महसूस किया होगा। जून 2026 की स्थिति के अनुसार, मध्य प्रदेश की सड़कों से लेकर जम्मू-कश्मीर की वादियों तक, आज हालात आम दिनों जैसे बिल्कुल नहीं हैं। स्कूल खुले हैं, लेकिन वोकेशनल एजुकेशन इन इंडिया की रीढ़ माने जाने वाले स्किल ट्रेनर्स गायब हैं।
दिल्ली में वोकेशनल ट्रेनर्स की सैलरी 38,100 कैसे हुई?
दिल्ली सरकार ने 6 मई 2026 को एक ऐतिहासिक आदेश पारित कर वोकेशनल ट्रेनर (वीटी) की सैलरी ₹38,100 कर दी है। इस फैसले ने इक्वल पे फॉर इक्वल वर्क को धरातल पर उतारा है, जिसका फायदा 1,131 ट्रेनर्स को सीधा मिला है। आग बिना चिंगारी के नहीं लगती। और इस पूरे राष्ट्रीय आंदोलन की चिंगारी उठी है देश की राजधानी से। आप सोच रहे होंगे कि अचानक जेएंडके और एमपी के ट्रेनर्स ने आज ही का दिन क्यों चुना? इसका सीधा कनेक्शन दिल्ली सचिवालय से है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता द्वारा पारित आदेश ने देश भर के ट्रेनर्स को चौंका दिया है। ज़रा सोचिए। एक तरफ राजस्थान, यूपी और बिहार में एक वीटी की औसत सैलरी मात्र ₹15,000 से ₹23,500 के बीच अटकी है। वहीं दूसरी तरफ, दिल्ली ने एक नया मानक तय कर दिया है।
दिल्ली के 1,131 वीटी ने बिना किसी हिंसक प्रदर्शन के, सिर्फ शांतिपूर्ण धरने का कानूनी लूपहोल इस्तेमाल करके यह बड़ी जीत हासिल की। कोई टर्मिनेशन नहीं, कोई पुलिस केस नहीं। यही ‘Delhi Model’ अब पूरे देश में एक लहर (Ripple effect) पैदा कर चुका है।
मध्य प्रदेश में आज वीटी धरना क्यों दे रहे हैं?
दिल्ली के ₹38,100 वाले ऑर्डर के वायरल होते ही मध्य प्रदेश के वोकेशनल ट्रेनर्स ने आज (29 जून) जॉब सिक्योरिटी और समान वेतन के लिए एक साथ कई जिलों में ग्राउंड प्रोटेस्ट शुरू कर दिया है। आज, 29 जून 2026 को, एमपी के वोकेशनल ट्रेनर्स ने सड़कों पर उतरकर एक साथ (Simultaneous) प्रदर्शन शुरू कर दिया है। यह कोई इत्तेफाक नहीं है, बल्कि दिल्ली मॉडल से प्रेरित एक सोची-समझी रणनीति है। ऑल इंडिया वीटी यूनियन के सदस्यों का एक ही सवाल है: “सिलेबस वही है, पढ़ाने का तरीका वही है, बच्चे वही हैं। तो फिर दिल्ली वाले को ₹38,000 और हमें ₹15,000 क्यों? क्या हम आधी स्किल पढ़ाते हैं?”
यह सवाल सीधा है, लेकिन इसका जवाब सरकारों के पास नहीं है। इसी जवाब को मांगने के लिए आज मध्य प्रदेश की सड़कें ब्लॉक हैं।
जम्मू कश्मीर में वीटी अनिश्चितकालीन प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
सीधी बात: जेएंडके में कड़ाके की ठंड (विंटर अलाउंस का संकट) और 4 महीने से रुकी सैलरी के खिलाफ जेकेवीटीडब्ल्यूए ने आज से अपना ‘अनिश्चितकालीन महा-आंदोलन’ शुरू कर दिया है। अगर मध्य प्रदेश का मामला सैलरी का है, तो जम्मू-कश्मीर का मामला भौगोलिक शोषण (Geographic Exploitation) और सर्वाइवल का है। जेकेवीटीडब्ल्यूए (J&K Vocational Trainers Welfare Association) ने कुछ दिन पहले सरकार को एक्स (Twitter) पर चेतावनी दी थी। आज वह मोहलत खत्म हो चुकी है। यहाँ कानूनी शब्दजाल (Legal Wordplay) का शानदार इस्तेमाल हुआ है। कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में धारा 144 का इस्तेमाल बहुत आम है।
अगर यूनियन ने ‘हड़ताल’ (Strike) शब्द इस्तेमाल किया होता, तो तुरंत कानूनी कार्यवाही हो सकती थी और कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के तहत वीटीपी कंपनियाँ उन्हें निकाल सकती थीं। इसीलिए उन्होंने “Indefinite Protest” (अनिश्चितकालीन प्रदर्शन) शब्द चुना, जो उन्हें कानूनी कवच देता है।
क्या राजस्थान सरकार का नया वीटीपी टेंडर अवैध है?
राजस्थान हाई कोर्ट ने 1 अप्रैल 2026 को मौजूदा वीटीपी प्रक्रिया को अवैध करार दिया था। इसके बावजूद, 22 जून को आरसीएसई ने ₹192.77 करोड़ का नया वीटीपी-आधारित टेंडर निकाल दिया, जो सीधे तौर पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट (न्यायालय की अवमानना) के घेरे में है। यह इस वक्त देश का सबसे बड़ा कानूनी बवंडर (Legal Crisis) है। 1 अप्रैल 2026 का वो ऐतिहासिक दिन याद कीजिए जब गोविन्द राम यादव बनाम राजस्थान राज्य केस में राजस्थान हाई कोर्ट ने मौजूदा वीटीपी प्रक्रिया को पूरी तरह से अवैध (illegal) करार दे दिया था। कोर्ट का साफ आदेश था कि वोकेशनल ट्रेनर्स की सीधी संविदात्मक भर्ती (direct contractual hiring) की जाए।लेकिन 22 जून 2026 को आरसीएसई (राजस्थान सरकार) ने कुछ ऐसा किया जिसने कानूनी जानकारों को भी हैरान कर दिया। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश की अनदेखी करते हुए, 2,502 ट्रेनर्स के लिए एक नया टेंडर जारी कर दिया।
चेतावनी – टेंडर का क्लॉज़ 7.3: अगर आप एक वीटीपी कंपनी हैं और इस टेंडर में बिड (Bid) करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। इस टेंडर में एक खौफनाक पेनल्टी क्लॉज़ छिपा है। अगर कोई वीटी दस्तावेज़ सत्यापन में अयोग्य साबित होता है, तो वीटीपी कंपनी पर प्रति डिस्क्वालिफिकेशन ₹1,00,000 की पेनल्टी लगाई जाएगी।
सोचिए! अगर हाई कोर्ट में किसी ने कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की याचिका डाल दी, और कोर्ट ने इस टेंडर को बीच में ही रद्द कर दिया, तो कंपनियों के करोड़ों रुपये डूब जाएंगे।
आगे का एक्शन प्लान और कानूनी विकल्प
राजस्थान के वीटी के पास अवमानना याचिका दायर करने का स्पष्ट कानूनी विकल्प है, जबकि अन्य राज्यों को ‘शांतिपूर्ण धरने’ के मॉडल को ही अपनाना चाहिए।
- राजस्थान के लिए कंटेम्प्ट पिटीशन: राजस्थान के वीटी को तुरंत हाई कोर्ट में नए ई-टेंडर के खिलाफ ‘अवमानना याचिका’ दायर करनी चाहिए। 1 अप्रैल का आदेश (Direct Contractual Hiring) पूरी तरह से स्पष्ट था।
- लीगल नोटिस फॉर बिडर्स: 9 जुलाई की डेडलाइन से पहले संभावित वीटीपी बिडर्स को कानूनी नोटिस भेजकर आगाह किया जाना चाहिए कि यह टेंडर हाई कोर्ट में विचाराधीन (Sub-judice) है।
- धरने का लीगल मॉडल: अन्य राज्यों के ट्रेनर्स को ज्ञापन (Memorandum) में ‘Strike’ शब्द का प्रयोग बिल्कुल नहीं करना चाहिए। “Peaceful Sit-in” ही लिखें ताकि आपकी नौकरी पूरी तरह सुरक्षित रहे।
निष्कर्ष और आपकी आवाज़
यह सिर्फ सैलरी बढ़ाने की लड़ाई नहीं है; यह भारत के वोकेशनल एजुकेशन सिस्टम में सम्मान की लड़ाई है। एक तरफ दिल्ली ने यह साबित कर दिया है कि अगर इच्छाशक्ति (Willpower) हो, तो ट्रेनर्स को ₹38,100 का उनका हक दिया जा सकता है। दूसरी तरफ राजस्थान में हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद वीटीपी कंपनियों का नया ₹192 करोड़ का टेंडर निकाला जा रहा है। आज उठी यह आवाज़ अब रुकने वाली नहीं है। जो ट्रेनर देश के युवाओं का भविष्य तैयार कर रहे हैं, वो आज खुद अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए मैदान में हैं।
(पारदर्शिता नोट: इस आर्टिकल में दिए गए सभी कानूनी तथ्य राजस्थान हाई कोर्ट के 1 अप्रैल 2026 के आदेश, दिल्ली सरकार के 6 मई 2026 के वेतन संशोधन सर्कुलर और राजस्थान ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल के टेंडर दस्तावेज़ों पर आधारित हैं। कानूनी कदम उठाने से पहले अपने यूनियन लीगल एडवाइज़र से परामर्श करें।)